तू ईश्वर है या अल्लाह मुझे एक नज़र ही आये

फिर मालिक तेरी दुनियाँ में क्यों झगड़ा है इंसानों में

हर दिशा दिखे तेरी झलकी हर साँस गिने तेरी गिनती

तेरी ही दी इन साँसों को क्यों छीना है हैवानों  ने

फिर मालिक तेरी दुनियाँ में क्यों झगड़ा है इंसानों में…..

धर्मों क़ौमों के ये झगड़े मुझे दूर दूर तक दिखते हैं

सिंदूर सुहागन की मांगों से नगर नगर में छुटते हैं

बच्चों को इन  हथियारों से क्यों लादा है हैवानों  ने

फिर मालिक तेरी दुनियाँ में क्यों झगड़ा है इंसानों में…..

अब्बास अल्वी

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