क्यूँ उदास हुआ खुद से है तूँ
कहीं भटका हुआ सा है,
न जाने किन ख्यालों मे
हर-पल उलझा हूआ सा है,
बता ऐ-दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है

हैखोया-खोया सा रहता है
अपनी ही दुनिया मे,
गुज़री हुई यादों मे
वहीं ठहरा हुआ सा है,
बता ऐ-दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या

हैशीशा-ए-ख्वाब तो टूटा नहीं
तेरे हाथों से फिसल के,
जो आँखों मे टूटे ख्वाब लिए
यूँ रूठा हुआ सा है,
बता ऐ-दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या

हैक्यों उम्मीद किए बैठा है तूँ
वफ़ा की इस जमाने से,
यहाँ कीमत लगी है प्यार की
इश्क़ बिका हुआ सा है,
बता ऐ-दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है


इंदर भोले नाथ

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