पूजा की सामग्रियां , दिये में घृत – तेल ।
तुमसे ही आराधना, तुम ही प्रभु से मेल ।।

तुमसे ही गुण- धर्म हों , तुमसे ही व्यापार ।
तुमसे संचित पुण्य हों , अपनापन औ प्यार ।।

तुम पूजा की थाल सी , पुष्प, धुँआ और धूप ।
तेरी बनकर आरती, मैं देखु उसका रूप ।।


परिपूर्ण त्रिवेदी

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