बता ऐ-दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है


क्यूँ उदास हुआ खुद से है तूँ
कहीं भटका हुआ सा है,
न जाने किन ख्यालों मे
हर-पल उलझा हूआ सा है,
बता ऐ-दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है

हैखोया-खोया सा रहता है
अपनी ही दुनिया मे,
गुज़री हुई यादों मे
वहीं ठहरा हुआ सा है,
बता ऐ-दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या

हैशीशा-ए-ख्वाब तो टूटा नहीं
तेरे हाथों से फिसल के,
जो आँखों मे टूटे ख्वाब लिए
यूँ रूठा हुआ सा है,
बता ऐ-दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या

हैक्यों उम्मीद किए बैठा है तूँ
वफ़ा की इस जमाने से,
यहाँ कीमत लगी है प्यार की
इश्क़ बिका हुआ सा है,
बता ऐ-दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है


इंदर भोले नाथ

चाहे जीते कोई या हारे कोई

चाहे जीते कोई या हारे कोई
पर बिगड़ी हालात को सुधारे कोई

जो दुर्दशा है आज इस उजड़े चमन का 
गुलिस्ताँ वतन का संवारे कोई 

कब तक लड़ोगे जाति-मज़हब के नाम पर
हम इंसानो को कभी इंसान पुकारे कोई

नहीं माँगता “इंदर” तुमसे मुकम्मल जहाँ
क़तरा-क़तरा सही वतन को निखारे कोई

चाहे जीते कोई या हारे कोई
पर बिगड़ी हालत को सुधारे कोई

इंदर भोले नाथ

जीन्हे भुलने में है…..हमने उम्र गुजारी


जीन्हे भुलने में है…..हमने उम्र गुजारी
काश़ हम उन्हें  दो वक्त याद आये तो होतें

बहाया अश्कों का सागर यादों में जिनके
काश़ वो आंसुओं के दो बूंद बहाये तो होतें

जीन्हे भुलने में है…..हमने उम्र गुजारी
काश़ हम उन्हें दो वक्त याद आये तो होतें

हमने सोंचा न था गम-ए-बयां लफ्जों से करेंगे
गर इस कदर इश्क़ में तुम”गालीब”बनाये न होते

जलता न दिल बारिश में भी…इस कदर युं
जो मैने आंखों में सावन बसायें ना होतें

जीन्हे भुलने में है हमने उम्र गुजारी
काश़ हम उन्हें दो वक्त याद आये तो होतें

इंदर भोले नाथ

वो सख्श मेरे सामने था खड़ा…..

वो सख्श मेरे सामने था खड़ा
मैं बस उसे देखता  ही रहा

सोचा उस से दो बातें करलें
पल दो पल की मुलाकातें कर लें

न जाने क्यूँ वो अपना सा लगा
वो सच था पर सपना सा लगा

इक कशिश थी उसकी आँखों में
इक बेचैनी थी उसकी  सांसों में

खुद को पाया मैंने उस में
न जाने क्यों वो आइना सा लगा

पहले भी मिला था शायद उससे
तब बड़ा ही दिल खुश लगता था

मगर आज कुछ खोया सा लगा
रूह तलक रोया सा लगा

नहीं था वो जुदा हमसे “इंदर”
वो शख्स मेरा साया सा लगा

इंदर भोले नाथ

तुम्हे चाहे कोई इतना…..

तुम्हे चाहे कोई इतना इस जमाने में नहीं होगा
मेरा दिल था मेरा दिल है मेरा दिल ही रहेगा सदा

मेरे ख्वाहिश मेरे अरमाँ हुए फना जिस पे वो
कातिल था वो कातिल है वो कातिल ही रहेगा सदा

वो मौजों की रवानी है वो दरियाँ की तूफानी है
मैं साहिल था मैं साहिल हूं मैं साहिल ही रहूंगा सदा

अधूरा इश्क़ ने ही हमको काबिल बना डाला वो
जाहिल था वो जाहिल है वो जाहिल ही रहेगा सदा

इंदर भोले नाथ

आज कल उनके लिए हम बेकार हो गये हैं


जीना मुश्किल था कभी जिनका हमारे बीना
आज कल उनके लिए हम बेकार हो गये हैं,

हमें देख कर कल निगाहें झुका ली
गैरों के लिए आज तैयार हो गये हैं,

आज कल उनके लिए हम बेकार हो गये हैं,

वो वो नहीं रहें अब जो छूई मूई सा लगा था
आशियाने से निकल कर बाजार हो गये हैं,

जो सहेम जाते थें रुह तक,देखकर काफिला
महफ़िलों में आज कल वो बेशुमार हो गये हैं,

आज कल उनके लिए हम बेकार हो गये हैं,

जो आंखों में ह़या थी अब काफूर सी हो गई हैं
कजरारे नैन आज कल तलवार हो गये हैं,

आज कल उनके लिए हम बेकार हो गये हैं,


इंदर भोले नाथ